जब सताए बुख़ार
जब सताए बुख़ार
अक्सर बुखार होने का अनुमान शरीर के गर्म होने, बदन दर्द, सर्दी लगने पर और जुकाम, खांसी से लगाया जाता है।
लक्षण :- बुखार में मरीज की पाचन क्रिया शिथिल हो जाती है। कमजोर हाजमा भी बुखार बढ़ाने में मददगार होता है। इसलिए दवा निश्चित समय पर देना, अनुपात से देना रोगी के हित में है।
परहेज :- पाचन शक्ति के क्षीण हो जाने से रोगी कुछ भी नहीं पचा पाता। ऐसे में तला भोजन, तेज़ मसालों के सेवन से पेट में जलन और दर्द होने लगता है। शीतल खाद्य पदार्थ या शीतल पेय भी हानिकारक है।
उड़द, अरबी, गोभी, कटहल आदि वायुविकार पैदा कर रोग बढ़ाती है। रोगी को खाने की इच्छा हो सकती है लेकिन हल्का भोजन थोड़ी मात्रा में कई बार देना चाहिए।
सोते रोगी को जगा कर न तो दवा ही दे और न ही भोजन। अधिक मात्रा में दूध भी हानिकारक है। सोने से एक घंटा पहले तो रात को भोजन अवश्य करा देना चाहिए।
प्राथमिक उपचार :- तुलसी के पत्तो का एक चम्मच रस गुनगुना करके पिलाना या तुलसी के पत्तो, अदरक का रस दोनों एक-एक चम्मच गुनगुना करके शहद में मिला कर पिलाने से लाभ होता है तुलसी के पत्ते अदरक की चाय बना कर या उक्त दोनों को उबाल कर पिलाने से लाभ होता है।
रोगी खाने का विशेष ध्यान रखना चाहिए, भोजन हल्का और थोड़ी मात्रा में समयानुसार देना चाहिए।
औषधि :- औषधियों में लक्ष्मी विलास रस या मृत्युंजय रस आदि एक-एक गोली की मात्रा में दी जा सकती है। त्रिभुवन किर्ति रस एक गोली, सूत शेखर रस एक गोली अमृता सत्व 250 मि. ग्राम मिला कर पीस कर देना लाभकारी है। इसका अनुपात शहद गर्म पानी या चाय हो सकता है।
बुखार के साथ खांसी भी हो तो सितोपलादि चूर्ण तीन ग्राम, अमृता सत्व 125 मि. ग्राम, चनद्रामृत रस की एक गोली पीस कर शहद अथवा तुलसी पत्र रस की अदरख के रस के साथ भी लेना लाभकारी है।
सर्दी लग कर एक दो दिन छोड़ कर आदि वाले बुखार में : - महासदर्शन चूर्ण तीन ग्राम मात्रा में गर्म पानी से लेना लाभकारी है।

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