बुद्धिवर्धक है अनार
बुद्धिवर्धक है अनार
अनार स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक, बलवर्धक, स्वास्थ्य रक्षक और रोगनाशक फल है। इसक सेवन किसी भी रोग में किया जा सकता है। पूर्ण लाभ के लिए इसका सेवन भोजन के बाद करना चाहिए। इससे पाचन शक्ति बढ़ती है और खाया गया भोजन शीघ्र हजम होता है।
औषधीय गुण
- अनार की छाल, सुजनवाले स्थान पर पीसकर बांधने या लेप करने से सूजन मिटती है।
- इसके सेवन से बुद्धि का विकाश होता है और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है।
- इसके दाने चबाकर खाने से भूख बढ़ाते है और पाचन शक्ति बढ़ाते है।
- बुखार में बार बार लगने वाली प्यास में इसका थोड़ा-थोड़ा रस पिलाने से लाभ होता है।
- इसके सेवन से पेशाब खुलकर आता है। गर्मी लगने अथवा अन्य किसी कारण से पेशाब पीला या जलन वाला हो तो अनार का रस तुरंत लाभ करता है।
- इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने से मुँह के छालों में आराम मिलता है।
- गले के रोगों में इसकी छाल का काढ़ा बनाकर गरारे करने से दर्द मिटता है।
- दिमागी कमजोरी, याददश्त की कमी तथा चक्क्र आने में इसका सेवन लाभकारी है।
- पेट में कीड़े होने पर इसकी जड़ का काढ़ा बनाकर एक से दो तोला खली पेट पीने से कीड़ो से छुटकारा मिलता है।
- अनार का छिलका मुँह में दबाकर रस चूसने से खांसी में लाभ होता है।
- इसके नियमित सेवन से शरीर पुष्ट, थकान दूर, भूख बढ़ना सही पाचन क्रिया और बुद्धि का विकास होता है

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